अहमदाबाद में रहने वाले किसान के बेटे ने किसानों के लिए शुरू की ‘ग्रीन क्रांति’!

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अहमदाबाद, अहमदाबाद के सैटेलाइट इलाके में रहने वाले किसान परिवार के युवा जतीन मनसुखभाई गजेरा ने किसानों के लिए आय का नया रास्ता तैयार करने की पहल शुरू की है। खेती में बढ़ती लागत, फसलों के दाम में अनिश्चितता और प्राकृतिक आपदाओं के बीच किसानों को खेती के साथ अतिरिक्त आय का स्रोत मिले, इसी दिशा में अमरेली से नई पहल शुरू की गई है।

अमरेली के शेडुभार गांव में गोपीनाथ Bio-CNG LLP द्वारा करोड़ों रुपये की लागत से Bio-CNG प्लांट का निर्माण किया जा रहा है। संचालकों के मुताबिक इस प्लांट में नेपियर घास और कृषि अवशेषों से Bio-CNG का उत्पादन किया जाएगा।

1000 बीघा में नेपियर घास की खेती

इस प्रोजेक्ट के तहत अमरेली जिले के अलग-अलग क्षेत्रों में करीब 1000 बीघा जमीन पर नेपियर घास की खेती शुरू की गई है।

किसानों को घास प्लांट तक पहुंचाने की जरूरत नहीं होगी। कंपनी द्वारा किसानों के खेतों पर ही वाहन और कटाई की मशीनरी भेजकर नेपियर घास की कटाई की जाएगी। इसके बाद घास को प्लांट तक पहुंचाया जाएगा।

संचालकों के अनुसार खेत पर ही घास का वजन, खरीद और भुगतान करने की व्यवस्था रखी जाएगी।

एक बार खेती के बाद साल में चार बार कटाई

प्रोजेक्ट से जुड़े लोगों के अनुसार नेपियर घास की साल में करीब चार बार कटाई की जा सकती है। उचित देखभाल के साथ लंबे समय तक उत्पादन लिया जा सकता है।

एक बार नेपियर घास लगाने के बाद किसान अपनी जरूरत के अनुसार आगे की खेती के लिए रोपण सामग्री तैयार कर सकते हैं, ऐसा भी प्रोजेक्ट से जुड़े लोगों का कहना है।

500 रुपये प्रति टन से शुरुआत का भाव

नेपियर घास की खरीद के लिए शुरुआत में करीब 500 रुपये प्रति टन का भाव तय करने की बात संचालकों द्वारा कही गई है। हालांकि क्षेत्र, उत्पादन और अन्य परिस्थितियों के अनुसार कीमत में बदलाव हो सकता है।

किसानों को कटाई, परिवहन और प्लांट तक माल पहुंचाने की चिंता न रहे, इसके लिए कंपनी की ओर से व्यवस्था की जाएगी।

कृषि अवशेषों से भी बनेगी Bio-CNG

प्लांट में सिर्फ नेपियर घास का इस्तेमाल नहीं किया जाएगा। गेहूं-चने का भूसा, कपास और अरंडी के कृषि अवशेषों का भी Bio-CNG उत्पादन में इस्तेमाल करने की योजना है।

इससे खेतों में बचे कृषि अवशेषों का ऊर्जा उत्पादन के लिए उपयोग किया जा सकेगा और किसानों के लिए अतिरिक्त आय का रास्ता तैयार हो सकता है।

रोजाना 10 टन से ज्यादा Bio-CNG उत्पादन का लक्ष्य

शेडुभार में बन रहे प्लांट में रोजाना 10 टन से ज्यादा Bio-CNG उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है।

नेपियर घास और अन्य बायोमास से पहले बायोगैस तैयार की जाएगी और इसके बाद उसकी प्रोसेसिंग करके Bio-CNG का उत्पादन किया जाएगा।

खेत में घास → प्लांट में बायोगैस → प्रोसेसिंग के बाद Bio-CNG

प्लांट से निकलने वाला अवशेष भी किसानों के काम आएगा

Bio-CNG उत्पादन के बाद बचने वाले अवशेष का इस्तेमाल ऑर्गेनिक खाद के रूप में करने की योजना होने की बात संचालकों ने कही है।

यानी खेत से कच्चा माल प्लांट तक जाएगा और उत्पादन प्रक्रिया के बाद मिलने वाला उपयोगी अवशेष दोबारा खेतों में इस्तेमाल किया जा सकेगा।

किसान के बेटे का सपना—किसानों को सीधा लाभ

जतीन मनसुखभाई गजेरा मूल रूप से शेडुभार गांव के रहने वाले हैं और वर्तमान में अहमदाबाद में रहते हैं। मूल रूप से कंस्ट्रक्शन क्षेत्र से जुड़े जतीन गजेरा का कहना है कि अपने गांव के किसानों को लाभ मिले और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा हों, इसी उद्देश्य से Bio-CNG क्षेत्र में यह प्रोजेक्ट शुरू किया गया है।

प्लांट शुरू होने के बाद कटाई, परिवहन, कच्चे माल के भंडारण और प्लांट के संचालन सहित विभिन्न क्षेत्रों में स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है।

फिलहाल प्लांट का निर्माण कार्य जारी है। संचालकों के अनुसार करीब आठ महीने में प्लांट को शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है।

प्रोजेक्ट सफल होने पर आने वाले समय में अमरेली जिले में पांच और Bio-CNG प्लांट स्थापित करने की योजना होने की बात भी कही गई है।

किसान के खेत में उगने वाली घास अब ऊर्जा में बदलेगी और ऊर्जा के साथ किसान की आय बढ़ाने का प्रयास किया जाएगा। अमरेली से शुरू हुई यह पहल आने वाले समय में ग्रीन एनर्जी और खेती के बीच एक नया मॉडल बन सकती है।

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