⭕इतिहास की त्रासदी से सीख लेकर मजबूत बनाएं राष्ट्र, विभाजन विभीषिका कार्यक्रम में बोले वक्ता
⭕विभाजन की पीड़ा बयां करते हुए छलक उठा वक्ताओं का दर्द
नई दिल्ली, स्वतंत्रता दिवस से ठीक एक दिन पहले देश भर में विभाजन विभीषिका का स्मृति दिवस मनाया जा रहा है। इसी कड़ी में राजेंद्र नगर स्थित सिंधु समाज में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में देश के विभाजन के दौरान विस्थापित हुए लोगों की पीड़ा और संघर्ष को याद किया गया। इस कार्यक्रम में शामिल लोगों ने भारत पाकिस्तान बंटवारे के दौरान बलिदान हुए लाखों लोगों को नमन किया। इस दौरान विभाजन के समय विस्थापित हुए करीब एक दर्जन लोगों को सिंधु समाज की ओर से गर्म चादर भेंट कर सम्मानित किया गया। इस कार्यक्रम में एक डॉक्यूमेंट्री प्रस्तुत की गई जिसमें विभाजन के समय का पूरा वृत्तांत सुनाया गया।
कार्यक्रम के दौरान मनोहर लाल करणा ने कहा कि इन लोगों का संघर्ष और धैर्य देश के इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा है। उन्होंने कहा कि विपरीत परिस्थितियों के बावजूद इन लोगों ने हार नहीं मानी और नए स्थानों पर अपने जीवन को फिर से स्थापित किया और इसके विपरीत पाकिस्तान का हाल आज भी बुरा है।
नरेश बेलानी ने कहा कि विभाजन की त्रासदी को याद करते हुए आज भी मन विचलित हो जाता है। धर्म के नाम पर हुआ विभाजन अपने पीछे ऐसा दर्द छोड़ गया, जिसे पीढिय़ां आज तक नहीं भुला पाई हैं। लाखों लोगों ने अपने प्राण गंवाए और करोड़ों लोगों को अपना घर-बार छोडक़र विस्थापित होना पड़ा। उन्होंने कहा कि इतिहास को याद करने का उद्देश्य केवल अतीत को दोहराना नहीं, बल्कि उससे सीख लेकर भविष्य को बेहतर बनाना है। उन्होंने कहा कि हमें यह समझना होगा कि किन परिस्थितियों में समाज में दूरियां बढ़ीं और विभाजन जैसी भयावह स्थिति पैदा हुई। अंग्रेजों की ‘फूट डालो और राज करो’ की नीति ने समाज को बांटने का काम किया। आज हमारा दायित्व है कि धर्म, जाति और भाषा के नाम पर किसी प्रकार का भेदभाव न होने दें। देश की एकता, अखंडता और भाईचारा ही हमारी सबसे बड़ी ताकत है।
जगदीश नागरानी ने कहा कि विभाजन के दौरान लोगों ने जो परिस्थितियां झेलीं, उनकी कल्पना करना भी मुश्किल है। इतिहास की इन घटनाओं को आने वाली पीढिय़ों तक पहुंचाना जरूरी है, ताकि वे देश की एकता और अखंडता का महत्व समझ सकें।
कार्यक्रम में सिंधु समाज के पदाधिकारी और अन्य गणमान्य व्यक्ति मौजूद रहे।
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