“गणतंत्र दिवस पर साहित्य साधना को सम्मान: लेखक सुधीर सलूजा हुए गौरवित”

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पानीपत (26 जनवरी 2026)गणतंत्र दिवस के पावन अवसर पर शहर में आयोजित भव्य समारोह में प्रसिद्ध लेखक एवं साहित्यकार सुधीर सलूजा को उनके उत्कृष्ट साहित्यिक योगदान के लिए सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें समाज, संस्कृति, इतिहास और विशेष रूप से पलायन, विभाजन, मानव संवेदनाओं तथा राष्ट्रीय चेतना जैसे गंभीर विषयों पर निरंतर लेखन और शोधपूर्ण कृतियों के लिए प्रदान किया गया। समारोह में मुख्य अतिथि हरियाणा सरकार में विकास एवं पंचायत मंत्री कृष्णलाल पंवार, उपायुक्त डॉक्टर वीरेंद्र कुमार दहिया, मनदीप कुमार नगराधीश, प्रशासनिक अधिकारी, शिक्षाविद, साहित्यप्रेमी, सामाजिक कार्यकर्ता तथा बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।

कार्यक्रम की शुरुआत ध्वजारोहण और राष्ट्रगान से हुई। मुख्य अतिथि श्री कृष्ण लाल पवार ने परेड का निरीक्षण किया। इसके बाद मार्च पास्ट, सांस्कृतिक कार्यक्रम और झांकियों का प्रदर्शन हुआ। इसके पश्चात गणतंत्र दिवस के महत्व पर प्रकाश डालते हुए वक्ताओं ने कहा कि यह दिन केवल संविधान की स्थापना का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह हमारे कर्तव्यों, अधिकारों और राष्ट्र के प्रति समर्पण का भी स्मरण कराता है।

यह सम्मान हिंदी भाषा में उत्कृष्ट लेखन , समकालीन मुद्दों पर रचनाओं और सांस्कृतिक धरोहर को बढ़ावा देने के लिए दिया गया।

लेखक सुधीर सलूजा ने अपने लेखन से इतिहास के उन पन्नों को जीवंत किया है, जिनसे नई पीढ़ी को सीख मिलती है। उन्होंने सामाजिक पीड़ा, विस्थापन, शरणार्थियों के संघर्ष, राष्ट्रीय एकता और मानवीय मूल्यों को अपने लेखन का केंद्र बनाकर समाज को जागरूक करने का कार्य किया है। उनका साहित्य न केवल तथ्यपरक है, बल्कि संवेदनाओं से भी परिपूर्ण है, जो पाठकों के हृदय को छू जाता है।
समारोह के दौरान सुधीर सलूजा को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर सुधीर सलूजा ने कहा कि लेखक का दायित्व केवल लिखना ही नहीं, बल्कि समाज की सच्चाइयों को सामने लाना और राष्ट्रहित में चेतना जगाना भी है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे साहित्य, इतिहास और संस्कृति से जुड़ें तथा राष्ट्र निर्माण में अपनी सक्रिय भूमिका निभाएं।
कार्यक्रम में उपस्थित बुद्धिजीवियों ने भी सुधीर सलूजा के लेखन की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनका साहित्य शोध, संवेदना और राष्ट्रभक्ति का अद्भुत संगम है। उनके लेख समाज को सोचने पर मजबूर करते हैं और इतिहास की सच्चाइयों को नई दृष्टि से देखने का अवसर देते हैं।
समारोह का समापन राष्ट्रगान से हुआ।

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