29-वर्षीय मरीज की थोरेसिक एब्डॉमिनल एओर्टा (छाती और पेट की महाधमनी) फटने के बाद उनकी जीवनरक्षा के लिए फोर्टिस गुरुग्राम में की गई सफल हाइब्रिड कार्डियाक सर्जरी

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 नई दिल्ली ( सुधीर सलूजा )06 जनवरी, 2026: फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट, गुरुग्राम ने 29-वर्षीय मरीज की दुर्लभ और जटिल हाइब्रिड कार्डियाक सर्जरी (मिनीमैली इन्वेसिव कार्डियोवास्क्युलर रिपेयर के साथ ओपन बायपास सर्जरी) को सफलतापू्र्वक अंजाम दिया है। मरीज छाती और पेट की महाधमनी (थोरेसिक एब्डॉमिनल एओर्टा) के फटने और बुरी तरह से पतला होने की समस्या से पीड़ित था और इस कंडीशन में मृत्यु की आशंका काफी अधिक होती है। उपलब्ध मेडिकल जानकारी के मुताबिक, दक्षिण-पूर्व एशिया में यह अपनी तरह की पहली सर्जरी है।

मरीज सैफ असलम, जो कि बिहार के पलामू जिले के रहने वाले हैं, इलाज के लिए फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट, गुरुग्राम आए थे। वह एओर्टा (यह महाधमनी पूरे शरीर को खून पहुंचाती है) के फटने की समस्या से जूझ रहे थे। लेकिन बिहार के कई अस्पतालों ने उनकी जांच के बाद उन्हें सीने में पानी/फ्लूड जमा होने की समस्या बतायी, और रक्तस्राव को रोकने के लिए उनके सीने में एक नली लगायी गई। इससे इलाज की बजाय उनकी हालत और बिगड़ने लगी और आंतरिक रक्तस्राव अनियंत्रित हो गया। 

अगले कुछ महीनों में मरीज की हालत इतनी खराब हो गई थी कि उनके हृदय ने काम करना कम कर दिया और यह महज़ 15% ही काम कर रहा था, जिसकी वजह से वह करीब एक महीने से बिस्तर तक सिमटकर रह गए थे और कभी भी अचानक घातक रक्तस्राव की आशंका भी बढ़ गई थी। मरीज ने बिहार के अलावा कोलकाता और बेंगलुरु तक के कई अस्पतालों के चक्कर लगाए ताकि उनकी कंडीशन का उपचार हो सके, लेकिन अधिक जोखिम को देखते हुए उनकी सर्जरी करने के लिए कोई भी राजी नहीं हुआ। आखिरकार, उन्हें फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट, गुरुग्राम में उम्मीद की किरण दिखायी दी जहां कार्यरत कार्डियो थोरेसिक वास्क्युलर टीम ने इस चुनौती को मेडिकल इमरजेंसी और जीवनरक्षक प्रक्रिया के तौर पर लिया। 

फोर्टिस गुरुग्राम में विस्तृत जांच के बाद, डॉ उद्गीथ धीर, प्रिंसीपल डायरेक्टर – कार्डियो थोरेसिक वास्क्युलर सर्जरी, फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट, गुरुग्राम के नेतृत्व में डॉक्टरों की टीम ने मरीज की जांच करने पर पाया कि उनकी पूरी थोरेसिक एब्डॉमिनल एओर्टा (यह महाधमनी हृदय से ऑक्सीजनयुक्त रक्त को पेट से होते हुए अन्य अंगों और नीचे पैरों तक पहुंचाने का काम करती है) बुरी तरह से फैली हुई थी और इसमें कई स्थानों पर रक्त के थक्के भी थे। परिणामस्वरूप, उनके शरीर के महत्वपूर्ण अंगों जैसे गुर्दों, जिगर और आंतों को सही ढंग से रक्त नहीं मिल पा रहा था और उनकी हालत भी बिगड़ने लगी थी। इस मामले की गंभीरता और कई प्रकार के जोखिमों को देखते हुए, मरीज की पारंपरिक ओपन सर्जरी करना संभव नहीं था, क्योंकि इसमें लकवा होने, अंगों के बेकार पड़ने का जोखिम काफी ज्यादा था और मरीज की मृत्यु भी हो सकती थी।

मामले की जानकारी देते हुए, डॉ उद्गीथ धीर, प्रिंसीपल डायरेक्टर – कार्डियो थोरेसिक वास्क्युलर सर्जरी, फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट, गुरुग्राम ने कहा, “मरीज का हृदय केवल 15% ही काम कर रहा था, जिसके कारण तत्काल किसी भी प्रकार का इंटरवेंशन खतरनाक हो सकता था। इस मामले की जटिलताओं के मद्देनज़र, हमने एडवांस हाइब्रिड सर्जरी करने का फैसला किया, जिसमें ओपन बायपास सर्जरी और मिनीमैली इन्वेसिव एंडोवास्क्युलर रिपेयर का मेल कराया गया था। इस प्रक्रिया के तहत उनकी फट चुकी एओर्टा (महाधमनी) को बंद करने के लिए स्टेंट ग्राफ्ट लगाया था। एंडोवास्कयुलर रिपेयर तकनीक की मदद से हाइब्रिड डीब्रांचिंग करना दुनियाभर में बेहद दुर्लभ वास्क्युलर प्रक्रिया मानी जाती है। इस हाइब्रिड प्रक्रिया ने शरीर के सभी महत्वपूर्ण अंगों को बेरोकटोक तरीके से रक्तापूर्ति सुनिश्चित करने के साथ-साथ स्पाइनल कॉर्ड को भी सुरक्षित रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी जिससे लकवा होने के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सका। इस बीच, पूरी प्रक्रिया के दौरान लगातार स्पाइनल कॉर्ड प्रेशर मॉनीटरिंग भी कई ताकि मरीज के स्नायुतंत्र को सुरक्षित रखा जा सके। इस अत्यंत चुनौतीपूर्ण, जोखिम से भरपूर और जटिल सर्जरी में मरीज की मृत्यु की आशंका लगभग 50% थी, लेकिन डॉक्टरों द्वारा कुशलता के साथ प्रक्रिया को पूरा किया गया और मरीज को रिकवरी के बाद अस्पताल से छह दिनों के बाद ही छुट्टी भी दे दी गई। उनकी हालत स्थिर बनी हुई है और हार्ट फंक्शन में कमजोरी के चलते फिलहाल उन्हें मेडिकल मैनेजमेंट पर रखा गया है, तथा उनके पूरी तरह से स्वास्थ्यलाभ के बाद भविष्य में कार्डियाक प्रक्रिया करने का विचार है।”

डॉ आनंद कुमार, सीनियर डायरेक्टर, कार्डियाक एनेस्थीसिया, फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्युट, गुरुग्राम ने कहा, “ऐसे गंभीर मरीजों का कारगर तरीके से उपचार करना बेहद जोखिमभरा परंतु उनकी जिंदगी बचाने के लिए बेहद जरूरी होता है, क्योंकि उनका ब्लड प्रेशर, हृदय की कार्यप्रणाली प्रभावित हो सकती है और स्नायुतंत्र को भी नुकसान पहुंच सकता है। इसलिए, एनेस्थीसिया की सही खुराक को काफी सावधानीपूर्वक तरीके से तय किया गया और लगातार मॉनीटरिंग भी की गई ताकि मरीज की हेमोडायनमिक स्थिरता बनी रही और कोई अतिरिक्त स्नायुगत नुकसान न पहुंचे।”

मरीज सैफ आलम ने कहा, “कई महीनों तक तकलीफ से जूझने और उत्तर एवं दक्षिण भारत में अनेक अस्पतालों का चक्कर लगाने के बाद मुझे अपने जीने की कोई उम्मीद नहीं बची थी। लेकिन फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट, गुरुग्राम के डॉ उद्गीथ धीर के पास इलाज के लिए रेफर किए जाने के बाद मुझे सही उपचार मिला और मेरे स्वास्थ्य में भी सुधार होने लगा। मैं उनका और अस्पताल का आभार व्यक्त करता हूं जिनकी वजह से मेरी हालत में सुधार हुआ मैं फिर से एक सामान्य जिंदगी जीने लगा हूं।”

यश रावत, फैसिलिटी डायरेक्टर एंड सीनियर वाइस प्रेसीडेंट, फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट, गुरुग्राम ने कहा, “इस उल्लेखनीय मामले ने एक बार फिर फोर्टिस मेमोरियल रिसर्च इंस्टीट्यूट, गुरुग्राम की एडवांस वास्क्युलर एवं एंडोवास्क्युलर सर्जरी के अग्रणी सेंटर के तौर पर तथा सर्वाधिक जटिल और अत्यंत जोखिमपूर्ण कार्डियोवास्क्युलर कंडीशंस के प्रबंधन की क्षमता से सुसज्जित अस्पताल के रूप में साख की पुष्टि की है।”

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