नई दिल्ली (सुधीर सलूजा) आज पुरानी दिल्ली ने अपने इतिहास का एक अभूतपूर्व और ऐतिहासिक दृश्य देखा। पुरानी दिल्ली की लगभग 100 से अधिक व्यापारिक संस्थाओं के प्रतिनिधियों व लगभग 500 व्यापारियों ने एक स्वर, एक मंच और एक उद्देश्य के साथ अवैध रेहड़ी-पटरी व्यवस्था के विरुद्ध शांतिपूर्ण लेकिन अत्यंत प्रभावशाली मार्च निकालकर यह स्पष्ट कर दिया कि अब व्यापारी समाज और अधिक अन्याय सहने को तैयार नहीं है।
यह मार्च केवल एक विरोध नहीं, बल्कि व्यापारियों के वर्षों के दर्द, पीड़ा, अपमान और प्रशासनिक उपेक्षा का विस्फोट था। सड़कों पर उमड़ी भीड़ ने यह सिद्ध कर दिया कि यह आंदोलन किसी एक संस्था या व्यक्ति का नहीं, बल्कि पूरे पुरानी दिल्ली के व्यापारिक समाज की सामूहिक चेतना है।
इस शांतिपूर्ण मार्च के माध्यम से व्यापारियों ने प्रशासन को साफ शब्दों में संदेश दिया है कि
• अवैध रेहड़ी-पटरी के कारण व्यापार चौपट हो चुका है,
• यातायात व्यवस्था ध्वस्त है,
• आम नागरिक परेशान है,
• और सबसे महत्वपूर्ण, पुश्तों से जमे-जमाए वैध व्यापार को सुनियोजित तरीके से बर्बाद किया जा रहा है।
आज के इस ऐतिहासिक आंदोलन के बाद प्रशासन को यह भ्रम नहीं रहना चाहिए कि व्यापारी समाज चुप बैठा रहेगा। यदि आज भी आवाज़ नहीं सुनी गई, तो व्यापारी अपने अस्तित्व, सम्मान और आजीविका की रक्षा के लिए हर लोकतांत्रिक सीमा तक जाने को मजबूर होगा। इसकी सम्पूर्ण ज़िम्मेदारी प्रशासन की होगी।
यह मार्च अनुशासित, शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक रहा, किंतु इसका संदेश अत्यंत कठोर और स्पष्ट है—
“अब बहुत हो चुका, व्यापारियों के सब्र की परीक्षा न ली जाए।”
इस ऐतिहासिक मार्च का आयोजन दिल्ली व्यापार महासंघ (पंजी॰) के नेतृत्व में आल वालड सिटी व्यापारिक संस्थाओं के दुबारा किया गया जिसमे प्रमुख रूप से देवराज बवेजा, चंद्रभूषण गुप्ता, अजय शर्मा, बलदेव गुप्ता, मुकेश सचदेवा, राकेश यादव, परमजीत सिंह ‘पम्मा’,राजेंद्र शर्मा, महेश सिंगल, श्री भगवान बंसल, सुशील गोयल, प्रवीण कपूर, अजय बजाज, ललित अग्रवाल, राजेंद्र कपूर एवं अन्य सैकड़ों व्यापारी प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
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