“भारत उधार का लोकतंत्र नहीं है — यह लोकतंत्र की जननी है, जिसकी जड़ें सदियों की विमर्श परंपरा में निहित हैं।”
नई दिल्ली (सुधीर सलूजा/ सानिध्य टाइम्स) “विधायिकाएं मात्र ईंट और पत्थर की इमारतें नहीं हैं, वे जनता की आवाज़, आकांक्षाओं और लोकतांत्रिक भावना को मूर्त [more…]