दिल्ली, पुरानी दिल्ली के समस्त व्यापारी एवं बाजार संघ की ओर से दिल्ली हिंदुस्तानी मर्चेंटाइल एसोसिएशन के महासचिव श्री भगवान बंसल ने नई दिल्ली के कांस्टीट्यूशनल क्लब में प्रेस कांफ्रेंस करके कहा कि पुरानी दिल्ली के प्रमुख थोक व्यापारियों द्वारा प्रशासन, न्यायपालिका से जुड़े प्रेक्षकों, नीति-निर्माताओं तथा आम जनमानस का ध्यान थोक बाजारों में बढ़ते जा रहे अवैध अतिक्रमण की अत्यंत गंभीर समस्या की ओर आकर्षित किया जाता है। स्थापित दुकानों के सामने अवैध रूप से रेहड़ी-पटरी लगना तथा अतिक्रमण का फैलाव प्रशासनिक संरक्षण और लापरवाही के बिना संभव नहीं है। व्यापक धारणा है कि बड़े पैमाने पर फैले भ्रष्टाचार के कारण ही ये अवैध गतिविधियाँ खुलेआम फल-फूल रही हैं।
यह उल्लेखनीय है कि माननीय न्यायालयों, जिनमें माननीय दिल्ली उच्च न्यायालय तथा माननीय भारत का सर्वोच्च न्यायालय शामिल हैं, ने बार-बार स्पष्ट किया है कि सार्वजनिक सड़कें, फुटपाथ तथा बाजारों के आवागमन मार्गों पर किसी भी प्रकार का अतिक्रमण स्वीकार्य नहीं है तथा पैदल यात्रियों और वैध व्यापारिक प्रतिष्ठानों के अधिकारों की रक्षा अनिवार्य है। इसके बावजूद थोक बाजारों में अवैध अतिक्रमण की निरंतर उपस्थिति न्यायालयों द्वारा स्थापित सिद्धांतों का प्रत्यक्ष उल्लंघन है।
इस गंभीर एवं लंबे समय से चली आ रही समस्या के विरोध में पुरानी दिल्ली के व्यापारियों द्वारा दो विशाल किन्तु पूर्णतः शांतिपूर्ण मार्च आयोजित किए गए — 4 फरवरी 2026 को सदर बाजार में तथा 12 फरवरी 2026 को चाँदनी चौक में। ये मार्च पूर्ण अनुशासन एवं गरिमा के साथ बिना किसी नारेबाज़ी के आयोजित किए गए, जिनका उद्देश्य केवल अवैध अतिक्रमण के कारण वैध व्यापारियों को हो रही भारी कठिनाइयों को लोकतांत्रिक एवं विधिसम्मत तरीके से उजागर करना था।
इन शांतिपूर्ण प्रदर्शनों का उद्देश्य यह भी था कि अतिक्रमण हटाने तथा बाजार क्षेत्रों में सार्वजनिक मार्गों को अवरोध-मुक्त रखने संबंधी न्यायालयों के निर्देश जमीनी स्तर पर लगभग अनुपालित ही बने हुए हैं, इस तथ्य की ओर प्रशासन का ध्यान आकर्षित किया जा सके।
इन शांतिपूर्ण प्रदर्शनों से उत्पन्न दबाव के बाद चाँदनी चौक में रेहड़ी-पटरी संचालकों द्वारा एक प्रति-मार्च आयोजित किया गया, जिसमें सरकार विरोधी नारे लगाए गए। विशेष रूप से एक अत्यंत आपत्तिजनक नारा —
“जो जमीन सरकारी है, वह जमीन हमारी है” — खुलेआम लगाया गया।
उस मार्च में भाग लेने वाले व्यक्तियों में बड़ी संख्या ऐसे प्रतीत हुई जिनकी कोई स्पष्ट पहचान उपलब्ध नहीं थी, जिससे गंभीर आशंका उत्पन्न होती है कि उनमें कुछ अवैध घुसपैठिए, जिनमें संदिग्ध बांग्लादेशी एवं रोहिंग्या शामिल हो सकते हैं, भी सम्मिलित थे। यदि इसकी पुष्टि होती है तो यह कानून-व्यवस्था तथा राष्ट्रीय सुरक्षा — दोनों दृष्टियों से अत्यंत गंभीर विषय है।
घटना के उपरांत जब प्रिंट एवं इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के प्रतिनिधियों ने प्रशासनिक अधिकारियों से विवादित नारों और मार्च के स्वरूप के संबंध में स्पष्टीकरण चाहा, तो कथित रूप से इस विषय को भ्रामक रूप से यह कहकर प्रस्तुत किया गया कि यह मार्च जामा मस्जिद क्षेत्र में न्यायालय के निर्देशानुसार अतिक्रमण हटाने से संबंधित कार्यवाही से जुड़ा हुआ था।
यह व्याख्या तथ्यात्मक रूप से गलत एवं भ्रामक है। व्यापारियों द्वारा निकाले गए शांतिपूर्ण मार्च थोक बाजारों में अवैध अतिक्रमण के विरुद्ध स्वतंत्र जन-प्रदर्शन थे और उनका किसी भी विशेष न्यायालयीन कार्यवाही से कोई संबंध नहीं था।
पुरानी दिल्ली के व्यापारी, जिनमें से अनेक पीढ़ियों से व्यापार कर रहे हैं या जिन्होंने वर्तमान बाजार दरों पर भारी निवेश कर अपनी दुकानें स्थापित की हैं, कानून का पालन करने वाले नागरिक हैं। वे नियमित रूप से जीएसटी, नगर निगम करों तथा अन्य सभी वैधानिक देयों का भुगतान करते हैं।
इसके विपरीत, अवैध रेहड़ी-पटरी संचालक नगर निगम के नियमों एवं न्यायालयीन दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करते हुए दुकानों के सामने सार्वजनिक स्थानों पर कब्जा करते हैं, बिना कर दिए सामान बेचते हैं तथा अनेक बार प्रतिबंधित या अनधिकृत वस्तुओं का व्यापार भी करते हैं। इससे न केवल अनुचित प्रतिस्पर्धा उत्पन्न होती है बल्कि बड़े पैमाने पर कर-चोरी तथा वैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन भी होता है।
जब वैध दुकानदार इन अवैध गतिविधियों का विरोध करते हैं या अतिक्रमण हटाने का अनुरोध करते हैं, तो उन्हें प्रायः टकराव और धमकियों का सामना करना पड़ता है। अनेक अवसरों पर स्थानीय प्रवर्तन एजेंसियाँ उल्टे दुकानदारों को ही जिम्मेदार ठहराती हैं, जिससे प्रशासनिक जवाबदेही पर गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े होते हैं।
अब पुरानी दिल्ली का व्यापारी वर्ग भावना, शक्ति और संसाधनों — तीनों स्तरों पर पूर्णतः एकजुट हो चुका है और इस निरंतर अन्याय का प्रतिरोध करने के लिए प्रतिबद्ध है।
अगले चरण में दिल्ली के विभिन्न बाजार संघों के साथ बैठकें आयोजित की जा रही हैं, क्योंकि अवैध रेहड़ी-पटरी एवं अतिक्रमण की समस्या ने राष्ट्रीय राजधानी के लगभग सभी प्रमुख व्यापारिक बाजारों को प्रभावित किया है।
विभिन्न बाजार संघों के सहयोग से पूरे शहर स्तर पर एक विशाल प्रदर्शन की योजना बनाई जा रही है। साथ ही निम्नलिखित वरिष्ठ पदाधिकारियों को ज्ञापन प्रस्तुत किए जाएंगे:
- माननीय प्रधानमंत्री, भारत सरकार
- माननीय केंद्रीय गृह मंत्री
- माननीय उपराज्यपाल, दिल्ली
- माननीय मुख्यमंत्री, दिल्ली
वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों से प्रतिनिधिमंडल मुलाकात कर न्यायालय के निर्देशों के अनुरूप अवैध अतिक्रमण हटाने हेतु व्यावहारिक एवं विधिसम्मत व्यवस्था विकसित करने पर भी चर्चा करेगा।
यदि आवश्यकता पड़ी तो दिल्ली भर के व्यापारी व्यापक स्तर पर आंदोलन तथा बाजार बंद करने जैसे कदम उठाने पर भी विचार करेंगे। व्यापारी वर्ग अब कानून एवं न्यायालयीन सिद्धांतों के निरंतर उल्लंघन को और अधिक सहन नहीं करेगा।
यह प्रेस विज्ञप्ति जनप्रतिनिधियों एवं वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों के लिए एक स्पष्ट और दृढ़ संदेश है:
दिल्ली का व्यापारी वर्ग अब जागरूक, संगठित और एकजुट है।
न्यायालयों द्वारा निर्देशित अतिक्रमण-रोधी उपायों का तत्काल एवं प्रभावी क्रियान्वयन आवश्यक है, ताकि आने वाली पीढ़ियाँ सुरक्षित, व्यवस्थित और कानूनसम्मत वातावरण में अपना व्यापार कर सकें।
इस अवसर पर आल इंडिया मोटर एंड गुड्स ट्रांसपोर्ट एसोसिएशन (पंजी॰) के अध्यक्ष राजेंद्र कपूर, सदर बाजार सेवा संघ के अध्यक्ष विपिन्न मल्होत्रा, भाजपा व्यापार प्रकोष्ठ के प्रभारी और राजौरी गार्डन मार्केट एसोसिएशन के अध्यक्ष रमेश खन्ना, भोलाराम मार्केट ट्रेडर्स वेलफेयर एसोसिएशन मोरी गेट दिल्ली के अध्यक्ष चंद्रभूषण गुप्ता, भागीरथ पैलेस इलेक्ट्रिकल मार्केट के अध्यक्ष अजय शर्मा व दिल्ली कैनवस मर्चेंट एसोसिएशन के प्रधान महेश सिंगल भी मौजूद रहे।
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